खाली खाली सी हैं बड़ी बड़ी हीरोइनें, ये साल भी चला...

खाली खाली सी हैं बड़ी बड़ी हीरोइनें, ये साल भी चला गया बस इंतजार में…!

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बीते कुछ सालों से काम का इंतजार करते करते हमारे सिनेमा की नामी हीरोइनें परेशान हैं। खाली खाली हैं। उनके पास कोई काम नहीं है। एक जमाना था, जब इनके पास काम ही काम था। सांस लेने की फुरस्त नहीं थी। लेकिन अब वक्त काटना भी मुश्किल हो रहा है। साल 2016 भी बीत रहा है, और इसके साथ हीरोइनों का समय भी कैसे समाप्त होता जा रहा है। इसी का लेखा जोखा –

 -साक्षी त्रिपाठी-

सन 2016 समझो चला ही गया। लेकिन खास बात यह है कि जाते जाते यह साल हमारी बहुत सारी नामी – गिरामी हीरोइनों के अभिनय के संसार को भी समेटकर अपने साथ ले जा रहा है। इसलिए जो लोग यह मानते हैं कि सिनेमा में हीरोइनों के लिए कमनीय काया, खूबसूरत चेहरा, अभिनय का अकूत भंडार और संबंधों का समृद्ध संसार ही काम पाने की पहली जरूरत है। उनको अपना ज्ञान दुरुस्त करने की जरूरत है। जूही चावला, करिश्मा कपूर, तब्बू, अमिषा पटेल, ट्विंकल खन्ना, महिमा चौधरी, रवीना टंडन, शिल्पा शेट्टी, रानी मुखर्जी, काजोल, ऐश्वर्या राय, माधुरी दीक्षित, प्रीति जिंटा, नेहा धूपिया, सुष्मिता सेन, बिपाषा बसु, मल्लिका शेरावत और उन जैसी अनेक हीरोइनों के जेहन अभिनय का अथाह सागर हिलोरें लेता हर किसी ने देखा है। काया की कमनियता के मामले में भी हमारी ये हीरोइनें स्वर्ग लोक की किसी अप्सरा से कम नहीं है। सौंदर्य की बात करें, तो उस मामले में भी हमारी ये हीरोइनें परियों की रानी को भी मात देने का माद्दा रखती हैं। सैकड़ों फिल्मों में इनके अभिनय के अदभुत अंदाज भी हम सबने देखे हैं। और सालों तक सिनेमा के परदे पर राज करने के बाद संबंधों के संसार का आलम इतना तो व्यापक है कि कहीं भी ये अपने परिचय की मोहताज नहीं है। फिर भी सारी की सारी बिल्कुल खाली खाली सी है। किसी के पास कोई काम नहीं।

वैसे भी संसार का नियम है कि समय कभी एक सा नहीं रहता। वह तो सही समय पर सही दिशा में लगातार आगे बढ़ता रहता है। जहां आज धूप है, वहां कल छांव जरूर आएगी। और उसके बाद घुप्प अंधेरा भी आएगा ही आएगा। इस सच्चाई को हर किसी को स्वीकारना ही होता है। जो इस सच को नहीं स्वीकारता, उसके पास सुख के संसार को सफलता से जीतने के बावजूद दुख के दावानल की दीवारें खड़ी हो जाती हैं, जिनके भीतर कैद होकर खत्म हो जाना ही उसकी नियती बन जाता है। फिर सिनेमा तो सिनेमा है। वहां तो हर साल एक के बाद एक आला किस्म की नई नई हीरोइनें परदे पर राज करने की दिशा में आगे बढ़ती जाती हैं। फिर सिनेमा भी ठहरा एक बाजार। और, बाजार का सिद्धांत है कि नया माल पुराने को चलन से बाहर कर देता है। बाजार में बहुत सारी नई हीरोइनें आई हैं। जिनमें चमक भी है, दमक भी है, धमक भी है और थकी हारी हीरोइनों को हराने के बाकी सारे तत्व तो उनमें पहले से ही मौजूद है। यही कारण है कि हमारे सिनेमा की बहुत सारी जमी जमाई हीरोइनें जबरदस्त चमक से भरे चमकीले ग्लैमर के संसार पर सालों तक राज करने के बाद भी जिंदगी के सबसे बढ़िया काम करने के दिनों में खाली खाली सी हैं। बहुत सारी सफलतम हीरोइनें भी हालात देखकर सिनेमा में खुद को खपाने की कोशिश करती दिखती हैं, तो कुछ टीवी के परदे पर दिखनेवाले कंपीटिशन में जज बनकर जीने की मजबूरियों की मोहताज हैं।

शिल्पा शेट्टी को लोग जब देखते हैं, तो सालों पहले जिस तरह से आहें भरते थे, वैसी ही आह उन्हें देखते ही आज भी निकलती है। उनकी खूबसूरती पर लोग आज भी मरते हैं और सिनेमा के संसार में उनकी अदाएं आज भी किसी भी हीरोइन के मुकाबले कमजोर नहीं है। फिर भी वे टीवी पर आनेवाले बच्चों के डांस शो में जज बनकर जीने को मजबूर हैं। लेकिन क्या करे, 8 सील हो गए, काम ही नहीं मिलता। यह साल भी चला गया। तब्बू को देखेंगे, तो उनकी खूबसूरती और उनकी सुंदर देह को देखकर दंग रह जाएंगे। और अभिनय के अंदाज उनके इतने जबरदस्त हैं कि उनकी अदाओं के सामने कई सारी हीरोइनें फीकी फीकी सी लगती है। लेकिन फिर भी ‘हैदर’ में शाहिद कपूर की मां का रोल करने की मजबूरी को जीना पड़ा। काम नहीं मिल रहा है। ‘फितूर’ में उनको काम तो मिला, पर बाद में खाली हैं। कुल मिलाकर वे हर पल इस जुगाड़ में देखी जाती हैं कि समय कैसे गुजारे। दिल्ली के व्यापारी संजय कपूर से तलाक लेने के बाद आजकल अपने नए बॉयफ्रेंड के साथ बिना शादी किए मुंबई में नए घर में रह रही करिश्मा कपूर की फिल्मी जिंदगी का कबाड़ा तो सन 2003 में शादी के साथ ही हो गया था। लेकिन उसके बाद भी वह ‘शक्ति’ और ‘बॉम्बे टॉकीज’ आदि फिल्मों में दिखीं जरूर। मगर अब बिल्कुल खाली हैं। दो बच्चों की मां करिश्मा अब भी दिखने में पहले से कई गुना ज्यादा खूबसूरत हैं। शरीर भी किसी भी मूरत सा गढ़ा हुआ लगता है। लेकिन फिल्मों में काम पाने को तरस रही हैं। यही हाल आज भी जबरदस्त सौंदर्य की मालकिन अमीषा पटेल का है। कोई सोलह साल पहले सन 2000 में रितिक रोशन के साथ ‘कहो ना प्यार है’ से अपनी फिल्मी जिंदगी की धमाकेदार शुरुआत करनेवाली अमिषा ने सनी देओल के साथ जबरदस्त हिट ‘गदर’  में भी अपने अभिनय के अंदाज बिखेरने में कोई कमी नहीं रखी। लेकिन पिछले लंबे समय से वे घर पर बोर हो रही हैं। उनके पास फिल्मों में काम करने को कोई प्रस्ताव नहीं है। महिमा चौधरी को देखेंगे, तो आपको लगेगा कि खूबसूरती उन पर आकर ठहर सी गई हैं। सिनेमा में काम करना भी उनको किसी भी नई हीरोइन के मुकाबले बहुत ज्यादा अच्छा आता है। लेकिन फिर भी ‘परदेस’ से धमाकेदार शुरूआत करनेवाली महिमा काम की तलाश में दर दर भटकने को मजबूर हैं। काफी समय से उनके पास कोई काम नहीं हैं और जो फिल्में उन्हें मिलीं, वे भी कोई छाप नही छोड़ सकीं। कुछ साल पहले महिमा ने ‘दरबार’ में काम किया था, लेकिन यह दरबार कब सजा और कब उजड़ा, किसी को याद नहीं।  मनीषा कोईराला की खूबसूरती आज भी वैसी ही लुभाती हैं, जैसी सिनेमा में काम करने के दिनों में दर्शकों को लुभाया करती थीं। वे कभी कभार किसी स्टोर के उदघाटन में जरूर दिख जाती हैं। लेकिन फिल्मों में उनके पास कोई काम नहीं है। लंबे समय से मनीषा सिनेमा के संसार से गायब हैं।

अपने अभिनय के अंदाज से दर्शकों के दिलों पर सालों तक राज करने वालीं जूही चावला लंबे समय बाद दो साल पहले ‘गुलाबी गैंग’  और ‘चॉक एंड डस्टर’ फिल्मों में दिखीं। दर्शकों ने उन्हें पसंद तो किया, लेकिन काम के मामले में वे भी बाकी बहुत सारी हीरोइनों की तरह खाली ही बैठी हैं। रवीना टंडन भले ही बीजेपी के नेताओं की चहेती होने के कारण इन दिनों बाल फिल्म बोर्ड की चेयरमेन की जिम्मेदारी उनके पास होने से व्यस्त है। लेकिन फिल्मों में रवीना के पास कोई काम नहीं है। वह दिखने में आज भी उतनी ही खूबसूरत है, और ऊम्र भी कोई ज्यादा नहीं है, सो शरीर भी कसा हुआ है और अभिनय के अंदाज में तो उनके खैर कतई कोई कमी नहीं है। लेकिन प्रोड्यूसर या निर्देशक उनको काम देने के बजाय नई बालाओं को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं।  ट्विंकल खन्ना ने हाल ही में अपना नया प्रोडक्शन हाउस खोला है। वे अपने पति अक्षय कुमार के प्रोडक्शन हाउस से अलग अपना कारोबार करेंगी। ट्विंकल को पर्दे से गायब हुए डेढ दशक से भी ज्यादा समय बीत चुका है। हीरोइन होने के बावजूद फिल्मों में उनके पास कोई काम न होने के कारण इंटीरियर डिजाइनिंग में उन्होंने खुद को व्यस्त रखा और उससे भी वक्त न कटा, तो किताब लिखकर खुद को खपाने की मजबूरी को जी रही हैं। अब वे अपने प्रोडक्शन हाउस में फिल्में बनाएंगी। प्रीति जिंटा भी गायब हैं। करण सिंह ग्रोवर के साथ शादी करने के पहले से ही लंबे समय से वे सिनेमा के परदे से गायब थीं। काम नहीं था, तो सारा पैसा क्रिकेट में लगाकर आइपीएल टीम खरीद ली। लेकिन वहां भी कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी, तो फिर से सिनेमा में अभिनय की कोशिश की। लेकिन काम नहीं मिला, तो इस साल शादी कर ली।  लंबे समय से खाली बैठीं उर्मिला माडोंतकर टीवी शो पर जज का काम भी करती रही। लेकिन ‘पिंजर’ जैसी फिल्म में अपने करके अपनी अभिनय क्षमता दिखा चुकी उर्मिला के पास फिलहाल काफी समय से कोई काम नहीं है। वो आखिरी  बार ‘दिल्ली सफारी’ नाम की फिल्म में नजर आईं थी। यह फिल्म बिल्कुल नहीं चली। रंगीला गर्ल के नाम से मशहूर हुई उर्मिला फिल्मों में काम पाने को बेताब हैं और काम है कि उनके पास ही नहीं आता। आदित्य चोपड़ा से शादी करके घर बसाने के बाद हाल ही में मां बन चुकीं रानी मुखर्जी फिर से फिल्मों में काम करने को बेताब हैं। लेकिन यशराज परिवार की बहू होने के कारण दूसरा कोई तो उन्हें शायद ही काम दे। रानी कुछ साल पहले ‘मर्दानी’  में अपने दमदार अंदाज में दिखी थीं। लेकिन रानी के पास भी वक्त ही वक्त है। लेकिन यह वक्त कट नहीं रहा।

माधुरी दीक्षित, काजोल, नेहा धूपिया, मल्लिकी शेरावत और ऐश्वर्या राय सहित बुद्धिमान हीरोइन के रूप में दर्शकों के दिलों पर राज करनेवाली सुष्मिता सेन जबरदस्त प्रतिभा की धनी हैं। इन सभी के पास कहीं न कहीं कोई काम तो है, लेकिन सिनेमा से संसार में कोई धमाकेदार काम इनको अब मिलेगा, इसकी गुंजाइश लगातार कम होती जा रही है। मल्लिका शेरावत जैसी धमाकेदार अभिनेत्री को भी काम का इंतजार करते करते जब थकान ने घर लिया, तो वे देश छोड़कर विदेशी फिल्मों में काम तलाशने चली गईं। ऐश्वर्या की भले ही इस साल दो फिल्में आईं, एक ‘जज्बा’ और दूसरी रणवीर कपूर के साथ ‘ऐ दिल है मुश्किल’। लेकिन नई हीरोइनों की खेप के आने से इन सभी के लिए भी अवसर लगातार सिमटते जा रहे हैं। इन सारी हीरोइनों का अभिनय शानदार रहा है। सुंदर तो वे हैं ही और दमदार भी हैं। लेकिन वे काम न मिलने के दर्द भी है। दरअसल, सन 2016 जा रहा है। और जाते जाते यह साल हमारी इन नामी हीरोइनों के काम पाने की उम्मीद को भी समेटकर अपने साथ ले कर जा रहा है। इस साल बहुत सारी हीरोइनों को कोई काम नहीं मिला। अगले सकाल का इंतजार है। देखते हैं, आगे क्या होगा। लेकिन, सच्चाई यही है कि वक्त तो बदल चुका है। वक्त वैसा भी, हमेशा एक सा कहां रह पाता है!

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