भूत नहीं, कमाऊ पूत!

भूत नहीं, कमाऊ पूत!

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-साक्षी त्रिपाठी-

दुनिया भर को भूत भले ही डराते होंगे, लेकिन सिनेमावाले भूतों पर फिल्म बनाकर खूब कमाई करते रहे हैं। और यह भी सच है कि पहले भले ही भूतों पर बनी फिल्मों में बड़े हीरो – हीरोइन काम नहीं करते थे, लेकिन अब तो अमिताभ बच्चन से लेकर शाहरुख खान तक सारे ही भूत बनने के लिए तैयार हैं। क्योंकि मामला आखिर कमाई का है। ‘फिल्लौरी’ से अनुष्का शर्मा भी भूत के जरिए कमाई की राह पर निकल पड़ी है।

सिनेमा का सीधा सा गणित है – कमाई। सिनेमा बनता है, लोग देखते हैं। लेकिन वह फोकट में नहीं दिखता। उसके लिए टिकट खरीदना पड़ता है। उसी में से सिनेमा बनानेवाले की कमाई निकलती है। कमाई करे भी क्यों नहीं। जब करोड़ों रुपए का खर्चा लगाकर फिल्म बनेगी और उसमें से अगर, कमाई नहीं निकलेगी, तो कोई सिनेमा बनाएगा क्यों ? लेकिन दर्शक कब तक सिनेमा देखता रहेगा, और निर्माता कब तक बनाते रहेंगे ? चिरकाल से पूछा जाता रहा यह सवाल आज भी सबसे बड़ा सवाल है। तो उसका जवाब सिर्फ एक ही है कि जिंदगी है, तो उसे खुश रखने के लिए कोई साधन भी चाहिए। और, मनोरंजन जिंदगी के लिए खुशी का सबसे बड़ा साधन है। सिनेमा दरअसल, मनोरंजन ही देता है। मनोरंजन के इस रास्ते में तरह तरह के मोड़ आते रहते हैं। हर मोड पर कोई नई कहानी मिलती है, उस कहानी में कई किरदार होते हैं। हर किरदार के कथानक होते है और हर कथानक की एक सीमा। लेकिन विषय सिर्फ चंद ही हैं। प्रेम, नफरत, अपराध, सैक्स और रहस्य। यही जिंदगी की असली तस्वीर भी है। इसीलिए सिनेमा भी इन्हीं के इर्द गिर्द घूमता रहता है। हालांकि हर फिल्म में ये पांचो ततेव होते हैं, लेकिन इन में कसे किसी एक को आधार बनाकर सिनेमा गूंथा जाता है। मगर, रहस्य को सिनेमा में आधार जरा कम ही मिला करता है। पर, जब भी मिला, तो उसने खूब धूम मचाई। हमारे संसार के सबसे बड़े रहस्य भूतों के अस्तित्व पर भी फिल्मों के बनने और देखने का सिलसिला रह रहकर चमकता रहा है। इसी कालचक्र में भूतों के अस्तित्व पर इस बार अनुष्का शर्मा की ‘फिल्लौरी’ आई है, जिसे खूब देखा जा रहा है।
दरअसल, भूत नहीं होते। बचपन से हम सारे लोग यही पढ़ते और सुनते आए हैं। और यह भी सुनते रहे हैं कि भूत से डरना नहीं चाहिए। लेकिन, जब भूत होते ही नहीं, तो उनसे डरने का तो सवाल ही नहीं आना चाहिए। मगर, जब डरने की बात आती है, तो साफ लगता है कि भूत होते तो हैं। सो, होते भी होंगे और दुनिया को भले ही डराते भी होंगे। मगर सिनेमावालों को कमाई दे जाते हैं। सही मायने में देखा जाए, तो हमारे सिनेमा के संसार के लिए भूत कोई भूत नहीं होते, कमाऊ पूत होते हैं। इसीलिए अनुष्का शर्मा अपने होम प्रोडक्शन की फिल्म ‘फिल्लौरी’ में भूतनी बनी है। अनुष्का ‘फिल्लौरी’ की सह प्रोड्यूसर हैं और प्रोड्यूसर के रूप में ‘एनएच-10’ के बाद उनकी यह दूसरी फ़िल्म है। यह फ़िल्म पंजाब के ‘फिल्लौर’ कस्बे की एक प्रेम कहानी है। इसीलिए इसका नाम ‘फिल्लौरी’ है। कहानी कुछ यूं है कि विदेश में रहनेवाला एक पंजाबी युवक अपने बचपन की प्रेमिका से शादी करने भारत लौटता है। पर वो मांगलिक है इसलिए उसे फेरे लेने से पहले एक पेड़ से शादी करनी होती है, ताकि उसके गृहस्थ जीवन में कोई तकलीफ ना आये। मन मारकर वह पेड़ से शादी करता है लेकिन बाद में वह पेड़ कट जाने के बाद उसे हर वक्त लगता है कि कोई अनजान सी चीज उसका पीछा कर रही है। फिर साफ होता है कि वह तो एक प्रेतात्मा है। लेकिन उस प्रेतात्मा के मन में अच्छी भावना है। ‘फिल्लौरी’ में इस प्रेतात्मा की एक प्रेम कहानी भी जो अधूरी रह जाती है। अधूरी प्रेम कहानी का राज़ ही ‘फिल्लौरी’ की कहानी है। अनुष्का शर्मा की यह ‘फिल्लौरी’ खूब देखी जा रही है और रिपोर्ट देखें, तो 24 मार्च 2017 को रिलीज यह फिल्म अपनी रिलीज के सिर्फ दो दिनों में ही बॉक्स ऑफिस पर 9.22 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुकी थी।
वैसे, भूतों पर बननेवाली फिल्मों के इतिहास में झांके, तो रामसे ब्रदर्स की फिल्मों का तो आधार ही सिर्फ भूत हुआ करते थे। रामसे ब्रदर्स ने भूतहा और डरावनी फिल्मों की जैसे फैक्ट्री ही खोल दी थी। उनकी पहली बड़ी हिट सन 1972 में आई थी- ‘दो गज़ ज़मीन के नीचे’। इसके बाद तो रामसे ब्रदर्स की लगातार तीन फ़िल्में ‘दो गज़ ज़मीन के नीचे’, ‘पुराना मंदिर’ और ‘वीराना’ जबरदस्त हिट रहीं। खूनी चेहरा और उड़ते हुए काले लबादे जैसा शरीर, खून सनी लाल आंखें और डरावना आलम इन फिल्मों की पहचान बन गई। बताते हैं कि रामसे बंधुओं ने उस जमाने में भूतों पर बनाई अपनी फिल्मों में जितना पैसा डाला, उसके मुकाबले हर फिल्म से दस – दस गुना ज्यादा कमाया।
असल में यह सफलता का शानदार रास्ता है और कमाई का भी। सो, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, शाहरुख खान, सलमान खान, अजय देवगन, नसीरुद्दीन शाह, बोमन इरानी और शाहिद कपूर ने भी भूत को रोल किया है। यही नहीं ऐश्वर्या राय, करीना कपूर और दीपिका पादुकोण भी फिल्मों में भूत का रोल निभा चुके हैं। और, अब अनुष्का ताजा भूत है, जो ‘फिल्लौरी’ में अपने इस किरदार से काफी खुश हैं। अनुष्‍का मानती है कि एक भूत का किरदार निभाना उनके लिए काफी मजेदार रहा। क्योंकि सामान्य तौर पर हर फिल्म में जीवित चरित्र का किरदार निभाना उबाऊ हो जाता है। वह मानती है कि कलाकार को हमेशा कुछ अलग करते रहना चाहिए। अनुष्‍का ने कहा कि ‘फिल्लौरी’ में मैंने भूतों के समुदाय का अच्छे से प्रतिनिधित्व किया है। वैसे देखे, तो महानायक के रूप में विख्यात अमिताभ बच्चन भूत बन कर फिल्‍म भूतनाथ सीरीज की दो दो फिल्‍में कर चुके हैं। एक ‘भूतनाथ’ और दूसरी ‘भूतनाथ रिर्टंस’। अमिताभ बच्चन ने दोनों फिल्मों में शानदार रोल किया और उन्हें इसके लिए काफी सराहा भी गया। ‘गजब’ फिल्म में धर्मेंद्र ने भी भूत का रोल किया था। विख्यात कथाकार विजयदान देथा की राजस्थान की पृष्ठभूमि पर बनी अमोल पालेकर निर्देशित फिल्म ‘पहेली’ में शाहरुख खान ने भी भूत का रोल किया था। सिनेमा के संसार में टिकट खिड़की पर सबसे ज्यादा कमाई करानेवाले हीरो के रूप में विख्यात सलमान खान ने भी ‘हेलो ब्रदर’ फिल्म में भूत का किरदार निभाया था। ‘टार्जन द वंडर कार’ में एक प्‍यार करने वाले पापा के भूत के किरदार में अजय देवगन ने दर्शकों को भावुक कर दिया। अपनी बेहतरीन कला अदायगी के लिए विख्यात नसीरूद्दीन शाह भी ‘चमत्‍कार’ में भूत का किरदार निभा चुके हैं, जो अपनी बेटी और उसके प्रेमी की मदद करता है और अपने हत्‍यारों को सजा भी दिलवाता है। शाहिद कपूर ने भी फिल्‍म ‘वाह लाइफ हो तो ऐसी’ में भूत का करेक्‍टर प्‍ले किया था। विक्रम भट्ट की फिल्मों में पुराने महलों और सुनसान हवेलियों में शातिर आत्माएं लोगों की ह्त्या तक कर दिया करती थी। विक्रम भट्ट निर्देशित फिल्म ‘राज़’ की सफलता के बाद भटकती आत्माओं की ‘राज़’ सीरीज की फिल्मों का सिलसिला शुरू हो गया। उनकी ‘1920’ और ‘1920 ईवल रिटर्न’ को देखर तो बच्चे डर के मारे सो भी नहीं सकते। रामगोपाल वर्मा की डरावनी फिल्मों में भी आत्माएं भटकती रही हैं। वर्मा की ‘फूंक’, उसके बाद फिर आई ‘फूंक-2’, ‘डरना मना है’, ‘डरना ज़रूरी है’, ‘वास्तुशास्त्र’ जैसी हर फिल्म में आत्माएं रह रहकर भटकती हैं और डराती भी हैं। ऐश्‍वर्या रॉय ने भी अमिताभ बच्चन और और शाहरुख खान के साथ फिल्‍म ‘मोहब्‍बतें’ में भूत का किरदार निभाया। दीपिका पादुकोण भी अपनी पहली फिल्‍म ‘ओम शांति ओम’ में भूत के रोल में ही नजर आयी थीं। करीना कपूर भी फिल्म ‘तलाश’ में भूत बनी थी।
सारी की सारी बड़े बड़े सितारों वाली भूतहा फिल्में भरपूर सफल रही। वास्तव में देखा जाए, तो भूत दरअसल सिनेमा के लिए कोई विषय नहीं है। यह एक फंडा है, जिसको समय समय पर हमारे सिनेमावाले अपनी कमाई के लिए विषय के रूप में इस्तेमाल करते रहते हैं। इसलिए मान लेना चाहिए कि सालों सालों से भूतों पर बनती रही फिल्मों की तरह ही ‘फिल्लौरी’ में भी भले ही कहानी भूत की हो, लेकिन सिनेमा के लिए भूत सिर्फ जादू का डंडा है। सो, घुमाया कि कमाई शुरू। अब तो आप भी मान ही लीजिए कि सिनेमा के लिए भूत असल में भूत न होकर कमाऊ पूत हैं। हैं कि नहीं ?

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