‘फुंसुक वांगड़ू’ का अनूठा प्रयोग, बनाया ‘ग्लैशियर’

‘फुंसुक वांगड़ू’ का अनूठा प्रयोग, बनाया ‘ग्लैशियर’

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लद्दाख. फिल्म 3 इडियट्स का मशहूर किरदार फुंसुक वांगड़ू अपने नायाब प्रयोगों से अपने टीचर से लेकर साथियों तक में जबर्दस्त लोकप्रिय था और उसे कई पुरस्कार भी मिले। हालांकि यह बात तो फिल्मी हुई लेकिन, असल जिंदगी के फुंसुक यानी सोनम वांगचुक भी अपने नए प्रयोग से दुनिया में मशहूर हैं। सोनम ने लद्दाख में पानी की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए ‘आइस पिरामिड’ बनाया है जिससे यहां लंबे समय के लिए पानी स्टोर किया जा सके। इस पिरामिड से लद्दाख में पानी की कमी और सिंचाई की मुश्किलों से पार पाया जा सकता है।

सोनम किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। इन्हीं की जिंदगी को आमिर खान ने अपनी सुपरहिट फिल्म थ्री इडियट्स में फुंगसुक वांगडू के किरदार के रूप में सबके सामने रखा था। लेकिन सोनम को अपने सेलिब्रिटी होने का अहसास करने में कोई रुचि नहीं है।


सोनम द्वारा बनाया गया आइस पिरामिड

शुक्रवार को फ्यूचर इंस्टीट्यूट की तरफ से आयोजित फ्यूचर टॉक इवेंट में वांगचुक ने बताया कि वह किस मकसद से और कैसे लोगों के हित में काम करते हैं या उसकी प्लानिंग करते हैं। वह पद्मश्री और रिटायर्ड सिविल इंजिनियर शेवांग नॉर्फेल से प्रेरित हैं, जिन्होंने लद्दाख के बाशिंदों की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए कृत्रिम ग्लैशियर तैयार करने के आइडिया हकीकत में तब्दील कर दिखाया था।

हालांकि, सोनम से इससे एक कदम आगे निकलकर नया विकल्प निकाला है। उन्होंने ‘आइस पिरामिड प्रॉजेक्ट’ के तहत एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जिससे कि स्थानीय लोगों की पानी की जरूरत को पूरा किया जा सके। पानी की किल्लत से जूझते क्षेत्र में यह आइडिया किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो रहा है। उन्होंने वर्टिकल आइस पिरामिड बनाए ताकि इनमें पानी को लंबे वक्त के लिए स्टोर किया जा सके। यह हर एक पिरामिड औसतन 35 से 40 मीटर ऊंचा है और इसमें एक वक्त पर तकरीबन 16 हजार क्यूबिक लीटर पानी स्टोर किया जा सकता है। इतने पानी से 10 हेक्टेयर जमीन को सींचा जा सकता है।

उन्होंने ऐसे लगभग 100 पिरामिड लद्दाख में तैयार किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस सिस्टम में ऐसा विकल्प भी तैयार किया है जिससे कि ग्लैशियर धूप में तेजी से नहीं पिघलता है। सोनम वांगचुक के इस नेक प्रयास से न सिर्फ स्थानीय लोगों को सिंचाई में मदद मिली बल्कि साथ ही वहां 500 से अधिक नए पेड़ भी लगाए जा चुके हैं।

वह पानी की कमी से जूझते लेह के युवा और किसान की हरसंभव मदद करने की कोशिश करते हैं। लद्दाख में बीते 20 वर्षों से शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे सोनम वांगचुक को हाल ही में प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘रोलेक्स अवॉर्ड’ से नवाजा गया। मूल रूप से इंजिनियर सोनम को यह पुरस्कार लोगों के जीवन स्तर को बेहतर करने और विश्व संस्कृति को बचाने के लिए दिया गया है। इस अवॉर्ड को हासिल करने के बाद सोनम ने कहा कि,’यह अवॉर्ड मेरे लिए नहीं, भारत के लिए है।’

सोनम वांगचुक की यह एकमात्र उपलब्धि नहीं है। वह 1990 के दौर से लद्दाख के युवाओं की बेहतर शिक्षा के मकसद से लगातार सेक्मॉल (स्टूडेंट एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख) एनजीओ का भी संचालन कर रहे हैं। उन्होंने यहां के बच्चों के एजुकेशनल लेवल को सुधारने के लिए राज्य सरकार और ग्रामीणों की भी मदद ली। इसके माध्यम से वह बच्चों को पहाड़ी क्षेत्र में फाइनैंस के अवसर कैसे खुलें, इसके बारे में भी ट्रेनिंग देते हैं। वह उनको खेती-किसानी, व्यापार आदि के बारे में भी जानकारी देते हैं ताकि बच्चे अपने भविष्य के रास्ते अपनी रुचि के हिसाब से खोल सकें।

आपको बता दें कि लद्दाख उत्तरी पहाड़ों की बेल्ट में बसा एरिया है जहां 2,500 से 4,000 फीट तक की ऊंचाई पर गांव बसे हैं। यहां के लोगों के लिए पानी की कमी सबसे बड़ी समस्या है। इसके साथ ही पिघलते हिमालयन ग्लैशियर भी यहां की आबादी के लिए खतरा है। सर्दियों में तो यहां का पारा कई बार माइनस 30 डिग्री तक जा पहुंचता है।

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